माँ भी एक मनुष्य है। और मनुष्य को — जीने के लिए — सिर्फ रोटी नहीं चाहिए। उसे अपनी आत्मा की आवाज़ भी चाहिए।”

— एक माँ की आत्मा की यात्रा, मूर्ति से मनुष्य तक — प्रारम्भ · भोर से पहले हर घर में एक स्त्री होती है जो अँधेरे से पहले उठती है। इससे पहले कि सूरज याद करे कि उसे उगना है — वह उठ जाती है। चूल्हा जलाती है। पानी रखती है। आटा गूँधती है। मंदिर … Continue reading माँ भी एक मनुष्य है। और मनुष्य को — जीने के लिए — सिर्फ रोटी नहीं चाहिए। उसे अपनी आत्मा की आवाज़ भी चाहिए।”