Home Loan vs Rent , वो बहस जो हर Indian family में होती है भाग एक — वो शाम जब सवाल उठा Lucknow के Gomti Nagar में Saxena परिवार का घर है। पुराना किराये का flat। तीन कमरे। छत पर tulsi का पौधा। Drawing room में एक पुरानी घड़ी जो अभी भी सही वक्त बताती …

Joan Robins
Joan Robins

I set up this blog to share interior design, travel and lifestyle inspiration for simple, relaxed living at home and beyond. You’ll find home tours, advice and tips, interviews, reviews, postcards from places I love and more – always with a focus on minimalism, muted colours and timeless, considered design.

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Home Loan vs Rent , वो बहस जो हर Indian family में होती है


भाग एक — वो शाम जब सवाल उठा

Lucknow के Gomti Nagar में Saxena परिवार का घर है।

पुराना किराये का flat। तीन कमरे। छत पर tulsi का पौधा। Drawing room में एक पुरानी घड़ी जो अभी भी सही वक्त बताती है।

उस रविवार की शाम — तीनों पीढ़ियाँ एक साथ थीं।

दादाजी — Ramkishan Saxena, 75 साल। ज़िंदगी भर किसान रहे। गाँव में ज़मीन थी। अब बेटे के पास शहर में रहते हैं।

दादी — Savitri Devi, 70 साल। गाँव में तुलसी-गाय-खेत — इन तीनों में जीवन गुज़ारा। अब flat की छोटी बालकनी में तुलसी का पौधा है। बस।

पापा — Suresh Saxena, 48 साल। Government job में senior officer। पूरी ज़िंदगी किराये पर रहे — transfers के कारण। अब retire होने में दस साल बाकी हैं।

मम्मी — Rekha Saxena, 45 साल। School teacher। Security चाहती हैं — अपना घर चाहिए। हर साल landlord का नोटिस डराता है।

आयुष — 28 साल। IT company में काम करता है। Influencers देखता है। “Rent is not waste” theory पर चल रहा है।

नेहा — 26 साल, आयुष की पत्नी। Chartered Accountant। Numbers जानती है। दोनों sides समझती है।


वो शाम chai और बिस्कुट के साथ शुरू हुई।

आयुष ने phone रखा और बोला:

“पापा, हम लोग Bangalore में किराये पर हैं — ₹22,000 महीना। एक Influencer का video देखा। उसने कहा — home loan लेना सबसे बड़ी गलती है। Rent is always better।”

Rekha मम्मी ने चाय की चुस्की ली। “यह Influencer वाला किसके घर में रहता है?”

“मम्मी—”

“नहीं, seriously पूछ रही हूँ।”

दादाजी ने आँखें बंद कीं। फिर खोलीं। बोले:

“बेटा, बैठो। पहले सबकी बात सुनो। फिर decide करना।”


भाग दो — आयुष की बात — Young Generation का View

आयुष ने phone खोला।

“देखो पापा। यह calculation है। Bangalore में एक decent flat का price है ₹80 lakh। Home loan लो — 20 साल के लिए। Monthly EMI होगी लगभग ₹65,000-68,000। Interest rate 8.5% पर।

20 साल में कुल payment — ₹1.56 crore। Property की कीमत ₹80 lakh। मतलब ₹76 lakh सिर्फ interest में गया।

अब अगर वही ₹65,000 EMI की जगह — ₹22,000 rent दो और बाकी ₹43,000 SIP में डालो — 12% return पर 20 साल में — ₹3.2 crore बन जाएगा।”

नेहा ने notepad पर कुछ check किया। “Calculation roughly सही है।”

“देखो — rent में flexibility है। Job Bangalore से Chennai shift हो जाए — कोई problem नहीं। IT sector में transfers होते हैं। Startups में uncertainty है। Home loan एक जगह बाँध देता है।

और यह Influencer — Ankur Warikoo ने भी यही कहा है। Nikhil Kamath ने भी।”

Rekha मम्मी ने कहा — “आयुष, तेरे ये influencer कब retire होंगे? तब कहाँ रहेंगे? किसी और के घर में?”

“मम्मी, retire होने तक इतना corpus बन जाएगा कि—”

“बन जाएगा। पर बनेगा?” दादाजी ने एक ही वाक्य में काटा।


भाग तीन — पापा की बात — Middle Age का दर्द

Suresh पापा ने चाय रखी। गहरी साँस ली।

“आयुष, तू numbers में बात कर रहा है। मैं ज़िंदगी में बात करता हूँ।

मेरी posting पिछले पचीस साल में — Lucknow, Allahabad, Varanasi, Kanpur, Agra — पाँच शहर। हर दो-तीन साल में घर बदला। हर बार landlord ढूँढो। Deposit दो। Deposit लड़कर वापस लो।

2018 में Varanasi में था। Landlord ने अचानक कहा — ‘घर खाली करो, बेटे की शादी है।’ दो महीने में घर ढूँढो। तेरी मम्मी की तबीयत खराब थी। तू दसवीं में था।”

Rekha की आँखें भर आईं।

“उस साल में तेरी मम्मी ने कहा था — ‘बस एक बार अपना घर हो जाए। बस एक बार।’ वो sentence मुझे आज भी याद है।

पर मैं दे नहीं पाया। Transfers थे। Uncertainty थी। Numbers ठीक नहीं थे।

आज — दस साल retire होने में हैं। अभी भी किराये में हूँ। यह मेरी सबसे बड़ी regret है।”

कमरे में silence आ गई।

“हाँ, interest ज़्यादा देना पड़ता है home loan में। पर एक बात बताओ — उस ₹3.2 crore corpus में — क्या तेरी मम्मी का वो ‘अपना घर’ वाला सुकून है? क्या रात को neend आती है जब landlord का notice नहीं आएगा?”


भाग चार — मम्मी की बात — Spouse का Attitude

Rekha मम्मी ने पहली बार directly बोला।

“आयुष, तू calculation करता है। मैं तुझे feeling बताती हूँ।

हर साल November-December में — जब lease renew होती है — दस दिन मेरे पेट में butterflies रहती हैं। क्या rent बढ़ेगा? क्या वो घर खाली कराएगा? हम कहाँ जाएँगे?

यह anxiety — यह पैसे से नहीं जाती। यह सिर्फ अपने घर से जाती है।

और एक बात — तू कहता है flexibility है। पर बच्चे होंगे तो? उनका school change होगा? उनके दोस्त बदलेंगे? बच्चों के लिए roots ज़रूरी होते हैं। Stability ज़रूरी होती है।

मैं teacher हूँ। मैंने देखा है — जिन बच्चों का घर frequent change होता है — उनमें एक instability आती है। Social anxiety आती है।”

नेहा ने धीरे से कहा — “मम्मी, यह point मैंने भी research में पढ़ा था। बच्चों के psychological development पर stable housing का बड़ा impact होता है।”

आयुष ने नेहा को देखा।

“तू भी मेरे against हो गई?”

“मैं against नहीं। मैं complete picture दे रही हूँ।”


भाग पाँच — दादाजी की बात — पुरानी पीढ़ी का ज्ञान

दादाजी बहुत देर चुप रहे।

फिर उन्होंने बात शुरू की — धीमे, स्थिर, किसी ऐसे इंसान की तरह जो बहुत देख चुका हो।

“बेटा आयुष, मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूँ। पर ज़िंदगी में एक बात समझ आई।

हमारे गाँव में एक कहावत है — ‘जिसके पास ज़मीन है, उसके पास कल है।’

हमारी पाँच बीघा ज़मीन थी। 1987 में flood आई। सब बह गया। पर ज़मीन रही। अगले साल फिर खेती की। ज़मीन ने हमें वापस खड़ा किया।

जब तेरे पापा शहर पढ़ने गए — ज़मीन के कारण पैसे मिले। जब बीमारी आई — ज़मीन गिरवी रखकर इलाज हुआ। जब शादी हुई — ज़मीन पर बरात आई।”

“दादाजी, शहर में तो ज़मीन नहीं होती—”

“बेटा, शहर में flat ज़मीन की जगह है। Property है। कोई asset है। Rent में क्या है? एक paper जो हर साल बदलता है।”

दादाजी रुके।

“और एक बात — English में एक कहावत है — ‘A man’s home is his castle.’ घर सिर्फ रहने की जगह नहीं — वो किला है। सुरक्षा है। Identity है।

तू Influencer की बात करता है। पर वो Influencer किस घर में बैठकर video बनाता है? क्या वो किराये में है? मुझे नहीं लगता।”


भाग छह — दादी की बात — गाय और खेत वाली wisdom

दादी अब तक चुप थीं।

वो उठीं। रसोई से एक और chai ले आईं। फिर बैठीं।

“मैं बस एक बात कहूँगी।

हमारे घर में गाय थी। हर सुबह उठकर गाय की सेवा करो। दूध लो। छाछ बनाओ। गोबर से आँगन लीपो।

यह सब routine था। पर उस routine में एक grounding था। एक connection था — ज़मीन से, प्रकृति से, जगह से।

जब तुम किराये में हो — तुम पौधा नहीं लगा सकते जो बड़ा हो। तुम दीवार पर नाखून नहीं ठोक सकते। तुम कुछ भी permanent नहीं कर सकते।

अपना घर हो — तो तुलसी लगाओ। Terrace पर एक छोटा सा garden बनाओ। अगर कोई farmstead हो — तो कुछ ज़मीन पर खेती करो। यह connection — यह rooted होना — यह पैसे से नहीं आता।

English में भी कहते हैं — ‘Bloom where you are planted.’ पर यह तभी होगा जब तुम planted हो। किराये में planted नहीं होते — floating होते हो।”


भाग सात — नेहा की बात — Balanced Financial View

नेहा ने notepad खोला।

“मैं CA हूँ। तो numbers दोनों sides के देखती हूँ।

पहले — Rent vs Buy का honest comparison:

Rent के फायदे — Flexibility। कम capital lock। Investment freedom। Geographic mobility।

Home Loan के फायदे — Forced savings। Asset creation। Stability। Tax benefit — Section 80C पर principal, Section 24 पर interest।

पर सबसे ज़रूरी point — जो लोग miss करते हैं।”


नेहा ने pen उठाई।

“आयुष कहता है — SIP में ₹43,000 डालो, ₹3.2 crore बनेगा।

पर यह तभी होगा जब —

एक — तुम actually डालो। हर महीने। 20 साल। Without fail।

दो — Market 12% return दे। यह average है — guaranteed नहीं।

तीन — Lifestyle inflation न हो। आज ₹43,000 बचा सकते हो — क्या 5 साल बाद भी बचाओगे जब बच्चे होंगे, खर्चे बढ़ेंगे?

Home loan — एक discipline है। EMI आती है — देनी पड़ती है। कोई choice नहीं। यह forced saving है।”

“और asset appreciation?”

“Bangalore, Mumbai, Delhi, Pune — इन cities में property price appreciation historically 7-9% रही है। Home loan rate भी 8.5% के आसपास है। Tax benefit जोड़ो — effective rate 6.5-7% आती है।

मतलब — cost of loan ≈ appreciation। Long term में property free हो जाती है।”

आयुष ने कहा — “पर liquidity? Property बेचना आसान नहीं।”

“सही बात है। इसीलिए कहती हूँ — यह either-or नहीं है। कुछ SIP करो। कुछ EMI दो। दोनों।”


भाग आठ — Vedic Wisdom क्या कहती है

दादाजी ने एक बात कही जो सबने सुनी।

“बेटा, हमारे shastras में ‘Grihastha Ashrama’ है। चार आश्रमों में — दूसरा। गृहस्थ का मतलब है — ‘grih’ — घर। जो घर में रहे, जो घर बसाए।

Rigveda में है — ‘गृहं नो अग्ने जरदष्टि।’ हे अग्नि, हमारे घर को दीर्घायु दो।

Manusmriti में गृहस्थ को सबसे important ashrama कहा गया है। क्योंकि गृहस्थ ही बाकी तीनों ashrama को support करता है।

Arthashastra में Chanakya ने कहा — ‘गृहस्थस्य क्रिया सर्वाः।’ गृहस्थ के कर्म सबसे ज़्यादा हैं। घर उसकी नींव है।”

“दादाजी, पर Vedic time में rent नहीं होता था?”

“नहीं होता था। गाँव में ज़मीन थी। Joint family थी। कोई homeless नहीं था। आज के शहरी life में — घर खरीदना ही उस ज़मीन की जगह है।”

दादी ने जोड़ा — “वास्तुशास्त्र — यह पूरा शास्त्र ही घर के बारे में है। घर कहाँ हो, कैसा हो, उसकी energy क्या हो। यह science तब develop हुई जब लोगों के पास अपने घर थे। Rental flat पर Vastu apply नहीं होता — क्योंकि वो तुम्हारा है ही नहीं।”


भाग नौ — Old English Wisdom

Suresh पापा ने कहा:

“मैंने एक English phrase पढ़ी थी — ‘There is no place like home।’ Dorothy ने Wizard of Oz में कहा था।

पर और भी हैं।

Benjamin Franklin ने कहा — ‘A house is not a home unless it contains food and fire for the mind and body.’

Samuel Johnson ने कहा — ‘To be happy at home is the ultimate result of all ambition.’

और सबसे practical — Warren Buffett ने कहा था — ‘If you’re going to be in one place for a long time, buying a home makes sense. The home I bought in 1958 for $31,500 is still the best investment I ever made — not financially, but in life quality.’

Buffett अभी भी उसी घर में रहते हैं — 65 साल बाद।”

नेहा ने note किया।

“और एक और — Robert Frost ने कहा था — ‘Home is the place where, when you have to go there, they have to take you in.’

Rental flat ऐसा नहीं है।”


भाग दस — Farmstead वाला angle

दादाजी ने एक नई बात उठाई।

“आयुष, तू Bangalore में है। IT में है। पर एक बात सोच।

हमारे गाँव में आज भी वो ज़मीन है। पाँच बीघा। मकान है — पुराना, पर है।

जब COVID आया — 2020 में — कितने IT वाले वापस गाँव गए? लाखों। क्यों? क्योंकि शहर में Rental flat था — landlord ने दबाव डाला। Job गई। पैसे नहीं थे।

जिनके पास गाँव में ज़मीन थी — वो वापस गए। खेती की। Survive किए।

यह farmstead — यह गाँव में property — यह Plan B है। Ultimate security है।”

“पर दादाजी, हम सब शहर में हैं—”

“हाँ। पर तेरी salary का एक छोटा हिस्सा — अगर तू outskirts में एक plot ले ले। या गाँव में थोड़ी ज़मीन खरीद ले। भविष्य में — वहाँ एक छोटा farmhouse बना सकते हो।

Organic farming का trend देखो। लोग शहर छोड़कर farmstead की तरफ जा रहे हैं। Mental peace के लिए। अच्छे खाने के लिए। Sustainable life के लिए।

Property सिर्फ flat नहीं होती। ज़मीन भी होती है।”


भाग ग्यारह — आयुष का मन बदला

बहुत देर की चुप्पी थी।

आयुष ने phone रख दिया था।

“पापा, एक बात पूछूँ। तुम्हारी सबसे बड़ी regret क्या है?”

Suresh पापा ने बिना सोचे कहा — “यह कि जब 2005 में Lucknow में posting थी — एक flat था। ₹18 lakh का। मैंने नहीं लिया। Loan डरा दिया। अब वही flat ₹85 lakh का है। और मैं अभी भी किराये में हूँ।”

“और तुम्हारी सबसे बड़ी learning?”

“कि घर की value सिर्फ investment में नहीं होती। घर identity देता है। Stability देता है। Family को root देता है।”

आयुष ने नेहा को देखा।

नेहा ने हल्के से कहा — “I’ve been thinking the same. Maybe Bangalore में ₹80 lakh नहीं। पर किसी tier-2 city में — जहाँ हम settle सोचते हैं — ₹40-45 lakh में decent flat मिल जाएगा। EMI ₹35,000। हमारा rent ₹22,000 है। Difference ₹13,000। उसपर tax benefit भी।

और Lucknow में दादाजी की ज़मीन है। भविष्य में वो farmhouse—”

दादाजी की आँखें चमकीं।


वो पाँच बातें — जो उस शाम निकलीं

पहली — कोई universal answer नहीं है। अगर तुम्हारी job highly mobile है, city frequently बदलती है, income uncertain है — तो rent sensible है। अगर तुम एक जगह settle हो रहे हो, stable income है, long term रहना है — तो buying better है।

दूसरी — Spouse का attitude decide करता है। यह purely financial decision नहीं है। अगर partner को घर की security चाहिए, अगर बच्चों की stability important है, अगर rent की anxiety affect कर रही है — तो वो factors numbers से बड़े हैं।

तीसरी — Influencer की life तुम्हारी life नहीं है। Ankur Warikoo और Nikhil Kamath brilliant हैं — उनसे सीखो। पर उनका situation, उनकी income, उनकी risk appetite — तुम्हारी नहीं है। उनकी advice को framework की तरह use करो — copy की तरह नहीं।

चौथी — Farmstead और गाँव की property — भूलो मत। शहर में flat के साथ — अगर outskirts में plot है, या गाँव में ज़मीन है — तो वो ultimate security है। COVID ने यह prove किया।

पाँचवीं — Vedic wisdom और English wisdom — दोनों एक ही बात कहते हैं। घर सिर्फ investment नहीं — identity है, root है, castle है। ‘A man’s home is his castle’ और ‘Grihastha Ashrama’ — दोनों एक ही truth हैं।


अंत — वो रात

Rekha मम्मी ने रात का खाना बनाया।

सब साथ बैठे खाए।

दादाजी ने खाने से पहले हाथ जोड़े। एक छोटी सी prayer। उस flat के लिए — जो किराये का था। पर जिसमें उनका परिवार था।

आयुष ने रात को नेहा से कहा — “Yaar, मुझे लगता है हम Lucknow में एक flat देखते हैं। Smaller city, affordable price। Bangalore job remote ho sakti hai eventually।”

नेहा मुस्कुराई।

“And maybe dadi ki garden idea bhi. Terrace garden. Small, par apna।”

बाहर Lucknow की रात थी।

किसी घर में light जल रही थी।

किसी घर में — किसी का अपना।


“गृहं नो अग्ने जरदष्टि।” हे अग्नि — हमारे घर को दीर्घायु दो। — ऋग्वेद

“There is no place like home.” — Dorothy, Wizard of Oz


उन सभी आयुष के लिए जो Influencer देखकर confused हैं। और उन सभी Rekha मम्मी के लिए जो हर November में anxiety में रहती हैं।

घर एक number नहीं है। घर एक feeling है। वो feeling — अपनी होती है। 🙏

By www.HappinessIsPossible.com

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