Chandigarh का dikhaawa, EMI का दर्द, और एक बुज़ुर्ग सरदारजी जिन्होंने गुरुद्वारे में एक ही बात कही जो ज़िंदगी बदल गई Chandigarh में एक अलिखित नियम है। कोई बोलता नहीं। कोई लिखता नहीं। पर हर कोई जानता है। अगर तुम Sector 8 में रहते हो — तो कार कम से कम Creta होनी चाहिए। अगर …

Joan Robins
Joan Robins

I set up this blog to share interior design, travel and lifestyle inspiration for simple, relaxed living at home and beyond. You’ll find home tours, advice and tips, interviews, reviews, postcards from places I love and more – always with a focus on minimalism, muted colours and timeless, considered design.

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Chandigarh का dikhaawa, EMI का दर्द, और एक बुज़ुर्ग सरदारजी जिन्होंने गुरुद्वारे में एक ही बात कही जो ज़िंदगी बदल गई


Chandigarh में एक अलिखित नियम है।

कोई बोलता नहीं। कोई लिखता नहीं। पर हर कोई जानता है।

अगर तुम Sector 8 में रहते हो — तो कार कम से कम Creta होनी चाहिए। अगर Sector 8 में Creta है, तो पड़ोसी के पास Seltos है। अगर Seltos है तो यार के पास Fortuner है। अगर Fortuner है तो साले के पास Land Cruiser है।

और इस शहर में पला-बढ़ा हर बंदा यह जानता है — पर मानने को तैयार नहीं।

हरमन सिंह भी नहीं था।


हरमन की ज़िंदगी — ऊपर से चमकती, अंदर से जलती

उम्र — 38 साल। नौकरी — एक private company में Marketing Manager, Mohali। घर — Sector 19, Chandigarh। Home loan — ₹68,000 प्रति महीना। गाड़ी — Fortuner। EMI — ₹42,000 प्रति महीना। बच्चा — एक। सात साल का। Gurleen। Convent school। Fees — ₹18,000 तिमाही। पत्नी — Simran। वो भी थकी हुई। Bank balance — महीने के आखिर में बस ₹3,000-4,000 बचते। कभी-कभी कम।

और फिर भी — Instagram पर हर weekend एक नई photo।

Fortuner की bonnet पर हाथ रखकर, sunglasses लगाकर। Chandigarh के किसी roof-top restaurant में। Gurleen के साथ किसी mall में।

Hashtag — #Blessed #ChandigarhLife #FortunrGang #LivingTheDream

Comments — “Bhai kya lifestyle hai 🔥🔥🔥”

Likes — 340।

और वो ₹42,000 की EMI — वो किसी photo में नहीं थी।


कहाँ से शुरू हुआ यह सब

हरमन यहीं पला था। Sector 19। उसके पड़ोसी के पास पहले Maruti 800 थी, फिर Swift आई — और उसके पापा ने कहा था — “देख, Sharma Uncle ने नई गाड़ी ली।” वो बस एक वाक्य था। पर उस वाक्य ने हरमन के दिमाग में एक seed लगाया — comparison का।

School में — किसके Reebok थे, किसके कपड़े branded थे। College में — कौन Bullet पर आता था। शादी में — honeymoon किसका Dubai में था।

और अब — 38 साल की उम्र में — वो seed एक पूरा जंगल बन चुका था।

हरमन को याद नहीं था कि आखिरी बार उसने कोई चीज़ अपने लिए खरीदी थी — किसी को दिखाने के लिए नहीं। वो Fortuner उसे सच में चाहिए नहीं था। Hyundai Creta perfectly काम करती। पर Sector में पड़ोसी Parminder के पास Fortuner था। तो Fortuner लेनी पड़ी।

₹42,000 महीना। 7 साल का loan।

पर photo पर 340 likes आए थे।


वो रात

महीने का आखिरी शनिवार था।

Salary account खोला। ₹1,87,000 आए थे।

EMI — home loan: ₹68,000। EMI — Fortuner: ₹42,000। School fees ki installment: ₹6,000। Bijli, पानी, grocery: ₹18,000। Insurance: ₹8,000। Parents को भेजे: ₹10,000।

बचे — ₹35,000।

Simran ने कहा — “Gurleen के लिए winter coat लेनी है। ₹3,500 की है।”

हरमन ने कहा — “अगले महीने।”

Simran ने कुछ नहीं कहा। पर उसकी आँखों में जो था — वो हरमन से छुपा नहीं था।

रात को हरमन ने Instagram खोला। एक दोस्त Rohit की photo आई — Dubai में था। Business class। Caption था — “Hard work pays off 🙏”

हरमन ने उसे like किया।

फिर फोन रखा।

छत को देखता रहा।

उस छत के पीछे ₹68,000 की EMI थी।

उसे नींद नहीं आई।


गुरुद्वारे जाना हुआ

Simran रोज़ Sunday को Sector 19 के गुरुद्वारे जाती थी।

उस Sunday — हरमन भी उठ गया। कोई खास कारण नहीं था। बस इतना था कि कहीं जाना था। बस कहीं।

जूते उतारे। अंदर गए। शबद हो रहा था।

“नानक दुखिआ सभु संसारु।” नानक — सारा संसार दुखी है।

हरमन रुक गया। वो line कानों में पड़ी और अंदर कहीं जा लगी।

सारा संसार दुखी है। सिर्फ मैं नहीं।

Simran और Gurleen अंदर चली गईं। हरमन बाहर के चबूतरे पर बैठ गया। सरोवर के पास। पानी में सुबह की रोशनी थी। निशान साहिब ऊपर लहरा रहा था।

और उनके बगल में बैठे थे — एक बुज़ुर्ग सरदारजी।


वो बुज़ुर्ग सरदारजी

नीला दस्तार। सफेद दाढ़ी। हाथ में माला। चेहरे पर वो शांति जो पैसे से नहीं, वक्त से आती है।

कुछ देर चुप रहे। फिर बोले — बिना किसी introduction के:

“Fortuner है तेरी?”

हरमन चौंका। “जी… हाँ।”

“EMI?”

हरमन को नहीं पता था क्यों — पर उसने सच बोला। “₹42,000।”

सरदारजी ने हल्का सिर हिलाया। न judgement था, न taunt था।

“घर का loan भी है?”

“₹68,000।”

एक लंबी चुप्पी।

“तू खुश है?”

यह सवाल था। बस इतना।

तीन शब्द। और हरमन के अंदर कुछ टूट गया।

“नहीं।”

पहली बार किसी से कहा।


जो सरदारजी ने कहा

सरदारजी ने कहानियाँ नहीं सुनाईं। lectures नहीं दिए। बस कुछ बातें कहीं — धीरे से, जैसे कोई पुराना दोस्त बात करता है।


“बेटा, Chandigarh का एक पुराना मर्ज़ है।”

“यह शहर सुंदर है — Le Corbusier ने बनाया, एकदम planned। पर इस planning में एक चीज़ plan नहीं हुई — comparison। यहाँ हर sector में एक race है। पड़ोसी से, यार से, साले से, college batch mate से।

गुरु नानक देव जी ने कहा था — ‘मनु जीतै जगु जीतु।’ अपने मन को जीत लो — दुनिया जीत ली। पर हम उल्टा करते हैं — दुनिया को दिखाने के लिए मन को तोड़ते रहते हैं।”


उन्होंने एक उदाहरण दिया।

“तुझे पता है — मेरे पड़ोसी थे Kapoor साहब। Sector 9 में। बड़ा घर था, BMW थी, हर साल foreign trip। बाहर से — perfect।

दो साल पहले — heart attack आया। 52 साल की उम्र में। Hospital में पड़े थे तो उनकी पत्नी रो रही थी। बोली — ‘इन्होंने ज़िंदगी में कभी खुश होकर खाना नहीं खाया। हर वक्त किसी से compete करते रहे।’

Kapoor साहब बच गए। अब उनके पास एक छोटी Maruti Swift है। और वो खुश हैं — पहली बार।”


“अब तुझे एक बात बताता हूँ।”

सरदारजी ने सरोवर की तरफ देखा।

“गुरु ग्रंथ साहिब में एक शबद है — ‘जिसु पहि नाही किछु किछु, तिसु आगै करह बिनती।’ जिसके पास खुद कुछ नहीं है — वो दूसरों के सामने क्या दिखाए?

तेरे पास Fortuner है — पर peace नहीं है। तेरे पास घर है — पर raat को नींद नहीं। यह दिखावे की दौड़ तुझे कहाँ ले जाएगी?”

हरमन के पास जवाब नहीं था।


“तुझे एक और example देता हूँ।”

“Sachin Tendulkar — जब वो खेलते थे, तो क्या वो Lara से compare करते थे? Ponting से? नहीं। वो अपने आखिरी innings से compare करते थे। अपने आप से।

और Warren Buffett — दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक — आज भी वही घर में रहते हैं जो उन्होंने 1958 में खरीदा था। $31,500 में। क्योंकि उन्होंने कभी दिखाने के लिए नहीं जिया।

तू किसके लिए जी रहा है हरमन?”


“Guru Nanak ji एक बार एक अमीर शहर से गुज़रे।”

“वहाँ के लोग बहुत घमंडी थे। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ थी। गुरुजी वहाँ से निकले तो शिष्यों ने पूछा — ‘गुरुजी, इस शहर को क्या आशीर्वाद दिया?’

गुरुजी बोले — ‘उजड़ जाओ।’

आगे एक गरीब गाँव था। वहाँ के लोग सादे थे, सच्चे थे। गुरुजी ने वहाँ से निकलते वक्त कहा — ‘बसे रहो।’

शिष्य हैरान — ‘गुरुजी, उल्टा क्यों?’

गुरुजी बोले — ‘जो उजड़ेंगे वो दूसरी जगह अपनी अच्छाई फैलाएंगे। जो बसे हैं, वो सच्चाई फैलाते रहेंगे। घमंड और दिखावा — यह बीमारी है जो फैलती है।’

हरमन — Chandigarh का यह sector culture एक बीमारी है। और तू infected है।”


“अब एक practical बात।”

“तू engineer है, पढ़ा-लिखा है। Calculate कर।

Fortuner की EMI — ₹42,000 x 12 = ₹5,04,000 साल में। 7 साल में — ₹35 lakh से ज़्यादा। इसमें interest अलग।

Creta लेता — EMI ₹20,000। बचत — ₹22,000 प्रति महीना। SIP में लगाता — 7% return पर — 10 साल में ₹38 lakh से ज़्यादा।

तू ने Fortuner में ₹35 lakh खोए। Simran के लिए उड़ नहीं पाया। Gurleen को winter coat नहीं दिला पाया। और 340 likes मिले।

340 likes की कीमत — ₹35 lakh?”

यह सुनकर हरमन के मुँह से आवाज़ नहीं निकली।


“आखिरी बात।”

“गुरु नानक जी ने जपजी साहिब में कहा — ‘नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला।’

Charhdi Kala — हमेशा ऊपर उठती आत्मा। पर यह ऊपर Fortuner से नहीं उठती। यह ऊपर तब उठती है जब तू दूसरों से compare करना बंद कर दे। जब तू अपनी ज़िंदगी को — अपनी, सिर्फ अपनी — नज़र से देखे।

तेरे पास एक बेटी है जो तुझे Papa बोलती है। एक पत्नी है जो तेरे साथ है। एक नौकरी है जो तुझे खिलाती है। यह wealth है — real wealth।

Fortuner उसे नहीं बना सकती।”


वो पल

अंदर से शबद की आवाज़ आई:

“नानक दुखिआ सभु संसारु। सो सुखिआ जिनि नामु विचारु।।”

नानक — सारा संसार दुखी है। वो सुखी है — जो नाम का विचार करे।

हरमन ने आँखें बंद कीं।

पहली बार उस दिन — उसने कुछ सोचा नहीं। Instagram नहीं। EMI नहीं। Rohit का Dubai नहीं।

बस वो शबद था।

Gurleen दौड़ती हुई आई — “Papa! Papa! Karah prasad मिला!”

उसके छोटे हाथों में दोना था।

हरमन ने उसे गोद में उठाया। उसके बाल में नाक घुसाई। वो खुशबू — वो बच्चे वाली खुशबू जो किसी gadi में नहीं मिलती।

उन्होंने मुड़कर देखा — सरदारजी नहीं थे। बस उनकी जगह पर एक marigold का फूल पड़ा था।


तीन महीने बाद

हरमन ने Fortuner नहीं बेची — loan था, बेच नहीं सकता था।

पर उसने एक काम किया।

Instagram से सारी car की photos delete कर दीं।

Simran को बताया — सब कुछ। EMI। बचत। असलियत। Simran रोई — पर राहत से। “मुझे पता था। मैं बस wait कर रही थी कि तुम खुद बोलो।”

दोनों ने मिलकर एक plan बनाया। जैसे ही Fortuner का loan खत्म हो — अगली बार एक simple गाड़ी। बची हुई EMI — Gurleen के नाम SIP।

Gurleen को उसी weekend winter coat मिली — ₹3,500 वाली।

वो इतनी खुश थी जितनी किसी mall में नहीं हुई थी।

हरमन ने वो photo नहीं डाली Instagram पर।

पर वो photo उसके दिल में अब भी है।


“मनु जीतै जगु जीतु।” अपने मन को जीत लो — दुनिया जीत ली। — गुरु नानक देव जी, गुरु ग्रंथ साहिब


उन सभी हरमनों के लिए जो Fortuner चला रहे हैं — पर रात को सो नहीं पाते।

गाड़ी की EMI किसी को नहीं दिखती। पर तुम्हारी थकान — तुम्हारे बच्चे की आँखों को दिखती है।

ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖ਼ਾਲਸਾ, ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫ਼ਤਹਿ। 🙏

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